अपने सपने हो गए

एक-एक कर सब अपने
अब सपने हो गए
कुछ सपने हैं
उसमें से कुछ ही अपने हैं
जाने पहचाने रिश्ते
अनजाने हो गए
देखते-देखते
क्या से क्या हो गए
कुछ पल में बदल गए
कुछ तो बस
यूं ही बदल गए
हम देखते रह गए कि
कब हम पराए हो गए
कोई पूछे नहीं हाल-चाल
रिश्तों में खटास
ऐसे ही गुज़रे
जाने कितने साल-दर-साल
सोचता हूं रूठ जाऊं
बस बहुत हो गया
ऐसे जीते-जीते, पर
मनाने वाला कौन है
जाने को चला जाऊं
सब छोड़ कर, पर
जाने के बाद
रोने वाला कौन है
चार दिन में भूल जाते हैं लोग
मतलब निकल जाने पर पूछते
भाईसाहब आप कौन हैं ?
जी रहा हूँ मैं, पर
किसलिए ?
किसके लिए ?

51 thoughts on “अपने सपने हो गए

  1. So deep Navneet sir and the lines
    जाने को चला जाऊं
    सब छोड़ कर, पर
    जाने के बाद
    रोने वाला कौन है
    beautifully written

    Liked by 4 people

  2. Simple yet deep ☺️

    Liked by 2 people

  3. Very beautiful.jeena hai apne liye aur apno ke kiye jo humpar nirbhar hain.farz pore karne hai ,zimmedariyon nibhani hai aur fir shanti se so jaana hai😊

    Liked by 4 people

    1. शुक्रिया आपका मीणा जी
      बिल्कुल सही कहा आपने
      ज़िम्मेदारियां निभानी है और फिर शांति से सो जाना है
      यही सच्चाई है जीवन की

      Liked by 1 person

  4. एक एककर मिले एक एककर बिछड़ जाएंगे।
    कुछ ही हैं जो मेरे लिए जीते हैं वही अंत तक रह जाएंगे।
    ताज्जुब है हमारे लिए जो जीते हैं हम उनके लिए नही जीते,
    हम जिनके लिए जीते हैं वही छोड़कर जाते हैं।
    वैसे जाना सभी को है।
    खूबसूरत रचना।👌👌

    Liked by 3 people

    1. शुक्रिया आपका मधुसुदन जी
      बिल्कुल सही फरमाया आपने
      जाना तो हम सभी को है एक दिन जिसपर हमारा कोई कंट्रोल नहीं

      Like

  5. *कल एक झलक ज़िंदगी को देखा,*
    *वो राहों पे मेरी गुनगुना रही थी,*
    *फिर ढूँढा उसे इधर उधर*
    *वो आँख मिचौली कर* *मुस्कुरा रही थी,*
    *एक अरसे के बाद आया मुझे क़रार,*
    *वो सहला के मुझे सुला रही थी*
    *हम दोनों क्यूँ ख़फ़ा हैं एक दूसरे से*
    *मैं उसे और वो मुझे समझा रही थी,*
    *मैंने पूछ लिया- क्यों इतना दर्द दिया*
    *कमबख़्त तूने,*
    *वो हँसी और बोली- मैं ज़िंदगी हूँ…….*
    _*तुझे जीना सिखा रही थी…..*

    ¸

    Liked by 2 people

    1. वाह मिश्रा जी
      जीवन जीते कम, काटते ज्यादा लोग हैं
      जाने से पहले सबके काश रह ही जाते हैं

      Liked by 1 person

    1. Thanks but I don’t believe in awards
      Sorry for not accepting this ☺️

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  6. Nice Navneet you write so well. 🙂

    Liked by 1 person

  7. मतलब निकल जाने पर पूछते
    भाईसाहब आप कौन हैं ? So true.

    Liked by 2 people

    1. सच में,
      मेरे साथ कई बार हो चुका है ऐसा
      शुक्रिया आपका माया जी 😃☺️🤗

      Liked by 1 person

  8. कटु यथार्थ

    Liked by 2 people

    1. शुक्रिया अनु जी 😃😁☺️

      Like

  9. बेहद खूबसूरत 👏👏

    Liked by 1 person

    1. शुक्रिया आपका ऋतु जी 😁☺️🤗

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    1. इस आग का मतलब मैं क्या समझूं 😅😅

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      1. Bhtt acha h.. aag laga di types 😂😂.. it’s really well penned. 😊

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        1. Ohh thanks yr 🤗🤩
          Mujhe lga poetry padh k aapko gussa aa gya isliye fire wala emoji comment kiya 🤣😅🤪
          Jaise aag babula hona 🤣🤣🤣

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      1. Hey it’s okay. I didn’t know this 🙂👍

        Liked by 1 person

  10. sahi hai…aaj kl k rishton ki kadwi sachchai yahi hai.

    Liked by 2 people

  11. I can feel it.
    Quite touching…

    Liked by 2 people

  12. आधुनिक युग के कटु सत्य को सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया है 👌🏼😊

    Liked by 2 people

    1. बहुत बहुत धन्यवाद आपका अनिता जी ☺️🤗

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  13. खूबसूरत👌

    Liked by 1 person

    1. धन्यवाद आपका ज़ोया जी 😁😃🤗💐🍫

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    1. Thank you Garima ji 🤗😃😁

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